पेट मे अफरा आयुर्वेदिक नुस्खे
अफरा
परिचय :--
इस व्याधि में रोगी रोगी का पेट फूल जाता है तथा उसमें वेदना उत्पन्न होकर समस्त शरीर को व्याकुल एवं एवं बेचैन कर देती है आचार्य चरक के अनुसार मलिन आहारों से जठराग्नि के मंद पड़ जाने से आहारों का पाचन नहीं होता है तब उदर में दोषों का संचय होने लगता है ।
कारण:--
इस व्याधि के उत्पन्न होने के मुख्य कारण आंत्रिक ज्वर, श्वसनक ज्वर, संग्रहणी आंत्र का पक्षाघात, वायु मुख द्वारा निकालने की आदत, विष के सेवन का प्रभाव, अतिसार, कब्ज इसके मुख्य कारण है।
लक्षण:---
जठराग्नि की दुर्बलता से अजीर्ण होकर डकारे आना छाती के अंदर जलन होना वायु का दबाव पड़ने से हृदय की धड़कन तेज हो जाना, सिर दर्द होना और चक्कर आना, पेट गड़बड़ना ,पेट में हर्ष समय अशांति सी अनुभव करना ।
घरेलू उपचार
1. एरंड का तेल और अदरक का स्वरस 20-20 ग्राम मिलाकर गर्म पानी के साथ पिएँ इसे वायु गोला में तुरंत लाभ पहुंचता है
2. सेंधा नमक, काली मिर्च, लौंग तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर रख ले, इसकी 2-3 ग्राम की मात्रा को 1 गिलास पानी में उबालकर पीए ।
प्रदीप ढुल
प्रदीप पाई आयुर्वेदिक केंद्र
बस स्टैंड के पास
गांव पाई जिला (कैथल) हरियाणा
9996250285


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