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औषधीय खेती विकास संस्थान आप सभी किसान भाइयों के लिये एक सुनहरा अवसर प्रदान कर रही है।

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मछर भागने के लिए कौनसे पौधे इस्तेमाल करें

हमारे आस-पास कुछ विशेष तरह के पौधे पाये जाते हैं जो मच्छर-मक्खियों को भगाने में बेहद कारगर हैं। आइए जानते हैं कौन-कौन से पौधे हैं। 1) लैवंडर :- भीनी-भीनी खुशबू वाला लैवेंडर का पौधा दिखने में बेहद खूबसूरत लगता हैं। इसकी खुशबू से मच्छर-मक्खियाँ पास में नहीं आते हैं। इसलिए इसे घर में लगाना अच्छा होता हैं। 2) लेमनग्रास :- यह एक तरह की घास हैं, जिसे इसकी मजबूत, नींबू जैसी खुशबू के लिए जाना जाता हैं, इसकी खुशबू मच्छरों को पसंद नहीं आती हैं, जिससे वे दूर रहते हैं। पौधे के अलावा लेमनग्रास ऑयल भी मच्छरों को भगाने में प्रभावी हैं। 3) तुलसी :- यह एक औषधीय और पूजनीय पौधा हैं, इसे घर के आंगन में लगाने से चारों ओर का वातावरण शुद्ध रहता हैं और घर में से मच्छर-मक्खियाँ भी दूर रहते हैं। 4) गेंदा :- गेंदे के फूलों की सुगंध जितनी हमें अच्छी लगती हैं, उतनी ही मच्छरों को बुरी लगती हैं। जहां गेंदे का पौधा लगा होता हैं, वहां मच्छर-मक्खियाँ पास में नहीं आते हैं। 5) पुदीना :- पुदीने की तेज खुशबू मच्छरों को दूर भगाती हैं, वहीं पुदीने के तेल या पत्तियों को मच्छर भगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता हैं। 6) रोजमेरी :-...

फ़सल में रोग और रोगों से बचाओ

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बागवानी करते समय यह बहुत सामान्य बात है कि पौधों में कीट लग जाते हैं। यह आपकी गलती या लापरवाही के कारण नहीं होता, बल्कि अक्सर मौसम के बदलाव और परागणकर्ताओं (पोलिनेटर्स) के माध्यम से कीट एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँच जाते हैं। इन पर हमेशा नियंत्रण रख पाना थोड़ा मुश्किल और कई बार नुकसानदायक भी होता है। यदि आप केवल जैविक उपायों से नियंत्रण रखना चाहें, तो यह हमेशा संभव नहीं होता। कहीं न कहीं, ये कीट आपकी नज़र से दूर अपना बसेरा बना ही लेते हैं और हरियाली आने पर प्रकट हो जाते हैं। दूसरी ओर, यदि आप रासायनिक उपायों का सहारा लेते हैं, तो कुछ हद तक सफलता मिल सकती है, पर इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी होते हैं। अत्यधिक रसायन प्रयोग करने से मित्र कीट जैसे परागणकर्ता भी नष्ट हो सकते हैं, जिससे फल वाले पौधों में फल आना कठिन हो सकता है। साथ ही, लगातार रसायन प्रयोग से कीटों में सहनशीलता यानी रजिस्टेंस विकसित हो सकती है। उनकी शरीर में ऐंटीबॉडी विकसित होकर उन्हें रसायनों से बचाने लगती हैं, और वे मरते नहीं हैं। इसलिए यदि समय पर कीटों की पहचान और उपचार किया जाए, तो कई समस्याओं से बचा जा सकता ...

एथेनॉल पर सरकार का वो फ्यूचर प्लान जो आम आदमी के साथ किसानों को देगा सीधा फायदा!

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एथेनॉल पर सरकार का वो फ्यूचर प्लान जो आम आदमी के साथ किसानों को देगा सीधा फायदा! बढ़ते पेट्रोल - डीजल के दामों कमककक केंद्र सरकार वैकल्पिक ईंधन के तौर पर एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ाने की बात 3zsd रीव2IQMNMMMलकह रही है. सरकार 6 महीने में देश भर में एथेनॉल पंप स्थापित करने की तैयारी में है.  ऐसा कहा जा रहा है कि एथेनॉल के इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन कम तो होगा साथ ही लोगों पर पेट्रोल के खर्च का भार भी कम हो जाएगा. ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से एथेनॉल गाड़ियां बनाने की अपील केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने फ्लेक्सी -फ्यूल इंजन मैन्यूफैक्चर करने की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से अपील की है.  फिलहाल भारत में एथेनॉल से चलने वाली कुछ ही गाड़ियां हैं, जिनका पुणे में ट्रायल चल रहा है.  कुछ साल पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एथेनॉल से चलने वाली बस का नागपुर में ट्रायल किया था. फ्लेक्सी -फ्यूल व्हीकल्स को ऑटोमोबाइल की दुनिया में FFVs के नाम से भी जाना जाता है. पेट्रोल- डीजल से चलने वाली गाड़ियों की तुलना में इनमें कुछ फीचर्स अलग होते हैं. फ्लेक्सी-फ्यूल व्हीकल्स के इंजन में आप अलग - अलग अनुपात में पे...

स्ट्रॉबेरी WINTER DOWN

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                                                      स्ट्रॉबेरी की खेती                          स्ट्रॉबेरी एक बहुत ही नाज़ुक फल होता है। जो की स्वाद में हल्का खट्टा और हल्का मीठा होता है। दिखने में दिल के आकर का होता है। और इसका रंग चटक लाल होता है। ये मात्र एक ऐसा फल है। जिसके बीज बाहर की और होते है। आपको जानकर आश्चर्य होगा की स्ट्रॉबेरी की 600 किस्में इस संसार में मौजूद है। ये सभी अपने स्वाद रंग रूप में एक दूसरे से भिन्न होती है। स्ट्रॉबेरी में अपनी एक अलग ही खुशबू के लिए पहचानी जाती है। जिसका फ्लेवर कई सारी आइसक्रीम आदि में किया जाता है। स्ट्रॉबेरी में कई सारे विटामिन और लवण होते है जो स्वास्थ के लिए काफी लाभदायक होते है। इसमें काफी मात्रा में विटामिन C एवं विटामिन A  और K पाया जाता है। जो रूप निखारने और चेहरे  में कील मुँहासे, आँखो की रौशनी चमक के साथ दाँतों की चम...

स्टीविया (मीठी तुलसी) की खेती में लागत और उत्पादन {अनुदान : 5000/-Rs प्रति माह (20 माह तक)

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स्टीविया (मीठी तुलसी) की व्यवसायिक खेती में लागत और उत्पादन फ़सल लगाने का सही समय : फरवरी से नवंबर  फ़सल का उत्पादन का समय :  हर 3 माह में कटाई होती रहेगी। और 60 माह तक कर सकते हैं। प्रति एकड़ में पौधों की संख्या : 25,000 पौधे (1x1) फिट पौधे से पौधे की दूरी खेत की तैयारी : गहराई से जुताई करने के बाद बैड 1- फिट चौड़े बनालें। पौधे की लागत : 1 लाख रुपये फ़सल का उत्पादन : 300 ग्राम प्रति पौधे की दर 25000×300=7500 किलो प्रोसेसिंग के बाद लगभग 60% सुख निकल जाती है। 7500Kg-60%=3000 किलो बाजार मूल्य : 3000 किलो ×100/-Rs=3 लाख वर्ष फ़सल से लाभ : 3 लाख रुपये अनुमानित अनुदान : 5000/-Rs प्रति माह (20 माह तक)  नोट-: औषधीय खेती विकास संस्थान की सहायता से किसान भाई औषधीय पादपों की खेती के लिए सभी प्रकार की सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। जैसे-: कॉन्टैक्ट फार्मिंग, बायबैक एग्रीमेंट, ट्रेनिंग, बीज व जैविक खाद, खेती के दरम्यान गाइडेंस ट्रेनिंग आदि। औषधीय खेती विकास संस्थान Contact Us -9044966260 www.akvsherbal.com ऐसे और पोस्ट देखने के लिए और औषधीय खेती विकास संस्थान से जुड़ने के लिए क्लिक करें 👇👇...

राष्ट्रीय बांस मिशन क्या है! { "National Bamboo Mission" }

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*_बारिश सबके आंगन में होता है। आपके हिस्से में कितना पानी आएगा। यह आंगन में रखे हुए कटोरे के ऊपर निर्भर करता है।_*  *प्रश्न:- राष्ट्रीय बांस मिशन क्या है?*   *उत्तर:-* राष्ट्रीय बांस मिशन कृषि मंत्रालय द्वारा प्रायोजित एक संगठन है जो भारतीय किसानों को बांस की खेती के लिए प्रोत्साहित करता है।  *प्रश्न:- राष्ट्रीय बांस मिशन की स्थापना कब की गई थी?*   *उत्तर:-* राष्ट्रीय बांस मिशन की स्थापना कृषि मंत्रालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2018-19 में की गई थी।  *प्रश्न:- बांस की खेती से किसानों को क्या लाभ है?*   *उत्तर:-* बांस की खेती किसानों के लिए सर्वाधिक लाभ की खेती है। धान, गेहूं, गन्ना, पपीता, केला  या किसी और भी फसल की तुलना में बहुत अधिक है। बांस की खेती से किसान प्रति एकड़ प्रतिवर्ष ₹200000 से ₹500000 तक कमा सकता है।  *प्रश्न:- बांस की खेती मे एक बार पौधरोपण के बाद कितने साल तक अनवरत उत्पादन लिया जा सकता है?*   *उत्तर:-* बांस की खेती में एक बार पौधरोपण के बाद लगातार 60 साल तक उत्पादन लिया जा सकता है।  *प्रश्न:- बांस उत्पादन ...

बांस की खेती के फायदे

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*बांस की खेती मतलब तनाव से मुक्ती (1 एकड़ बनाम 4 एकड़)*   *1:-* 1 एकड़ में बांस की खेती का आमदनी किसी और फसल की खेती के तुलना में 4 गुना से भी अधिक होता है।  *2:-* बांस की खेती बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में भी किया जा सकता है  *3:-* बांस की खेती पोषण और बंजर जमीन में भी किया जा सकता है।  *4:-* बांस की खेती धूंस वाली जगह पर भी किया जा सकता है।  *5:-* बांस की खेती पर मौसम का कोई असर नहीं होता है।  *6:-* बांस की खेती पर जलवायु का कोई असर नहीं होता है।  *7:-* बांस की खेती पर ओलावृष्टि का भी कोई असर नहीं होता है।  *8:-* बांस की खेती में पौधारोपण के बाद 60 साल तक लगातार फसल का उत्पादन लिया जा सकता है।  *9:-* बांस की खेती ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को कम करके अगली पीढ़ी को सुरक्षित पर्यावरण देने में भी सक्षम है।  *नोट:-* इसीलिए किसानों को अपनी क्षमता के हिसाब से बांस की खेती करनी चाहिए। 👉बांस की खेती मतलब हरा सोना अनुबंध के साथ खेती करने के लिए संस्था से संपर्क करें। *औषधीय खेती विकास संस्थान* Mo -9044966260 www.akvsherbal.com https:...

मिल्क थिस्टल की खेती {Silybum Marianum}

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मिल्क थिस्टल की बोआई की प्रक्रिया। 👉जमीन को अच्छे से 4 से 5 गाड़ी गोबर की खाद मिला कर अच्छे से मिला कर जुताई करवा लेना है। 👉मिट्टी को भुरभुरी करवा लेना है। 👉जमीन में  पटेला लगा कर एक बार चलवा लेना है। 👉उसके बाद बीज़ का छिड़काव करना है। 👉उसके बाद पटेला एक बार पुनः चला लेना है। 👉उसके बाद 5 फुट के बाद एक एक नाली बना लेना है। 👉बीज़ डालने एक सप्ताह बाद  नाली में पानी चलवा कर मिट्टी को नमी दे देनी है। 👉अंकुरण व जमीन की स्थिति को देखते हुए पानी अर्थात सिंचाई देनी है। 👉अनुमानित 3 से 4 महीने में फूल आना प्रारम्भ हो जाता है।जिसकी परिपक्वता अनुमानित 15 दिनों में हो जाती है।उसे कटवा कर सुखाते हुए एकत्रित करना  होता है।इस प्रकार 6 महीने के आस पास लगभग फ़सल आ जाती है। 👉यदि सिंचाई की व्यवस्था हो तो आप 2 महीने और फ़सल को चला सकते है और उत्पादन बढ़ा सकते है। औषधीय खेती विकास संस्थान सम्पर्क:-9044966260 website : www.akvsherbal.com 🙏नमस्कार दोस्तों🙏 सभी से अनुरोध है कि इस पोस्ट को ध्यान से पड़े।  नोट:- उपरोक्त विवरण में लागत,आय,खर्च,समय आदि सामान्य रूप से ली जाने वाली फसल के आधार ...

लेमनग्रास की खेती (नींबू घास)

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लेमनग्रास की खेती  ( नींबू घास) एक ऐसी फसल जिसकी खेती बंजर से बंजर भूमि, ऊसर, अनुपजाऊ, सूखाग्रस्त क्षेत्रों, पथरीली, कंकरीली जमीनों, पहाड़ों, जंगलों सड़कों, तालाबों, रेलवे पटरिओं के किनारे तथा उबड़ खाबड़ जमीनों पर बड़ी ही आसानी से कर सकते है I फसल परिचय लेमन ग्रास को चाइना ग्रास, नींबू घास, मालाबार घास, और कोचीन घास भी कहते है ! यह सरपत, या कुश के पौधे की तरह झुण्ड में होता है एवं एक झुण्ड में लगभग 20-25 पौधे होते है जिन्हे स्लिप कहते है I इस पौधे की पत्तियों से तेल निकाला जाता है, इसमें CITRAL नमक तत्व होने के कारण इसमें नीम्बू की खुशबू होती है, जिसका प्रयोग, उत्पादों में सुगंध डालने हेतु किया जाता है, खासतौर से हर्बल, कॉस्मेटिक, डिटर्जेंट, साबुन, चाय आदि उद्योगों में भारी मांग रहती है, व्यापारी को बस पता चलने की देर होती है की फलाना क्षेत्र में इसे उगाया जा रहा है, वह आकर आपके घर से खरीद ले जाता है I फसल उत्पादन में लागत: कोई भी किसान जो इसकी खेती करता है वहां से आपको एक स्लिप 1.50 रूपये में मिल जाएगी और प्रति एकड़ तकरीबन 22,000 स्लिप रोपी जाती है यानि प्रति एकड़ 33,000 रूपये की लगत सि...